फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ 7 गिरफ्तार करोड़ों से ज्यादा कि कर चुके थे ठगी
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24x7 गाजियाबाद न्यूज़
जनपद गाजियाबाद की कविनगर पुलिस व साइबर सेल की टीम ने कौशांबी में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनका एक साथी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। आरोपित कॉल सेंटर से लोगों को फोन कर उनके इंश्योरेंस की मैच्योरिटी के नाम पर ठगी करते थे। आरोपित अलग-अलग स्थानों पर कॉल सेंटर पिछले छह साल से संचालित कर रहे थे और किसी को भनक तक नहीं लगी। पुलिस के मुताबिक, आरोपित 500 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। पकड़े गए आरोपितों में दो युवतियां भी शामिल हैं, जो लोगों को कॉल करती थीं। इनमें एक भाई-बहन भी शामिल हैं।
शुक्रवार को कविनगर थाने पर आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस अधीक्षक शहर प्रथम निपुण अग्रवाल व क्षेत्राधिकारी कविनगर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि पकड़े गए आरोपित दिल्ली के सरिता विहार निवासी प्रदीप प्रसाद, इंदिरापुरम निवासी राहुल उर्फ मोनू, दिल्ली मंडावली निवासी सुमित मलिक, दिल्ली सरिता विहार निवासी रूपेश कुमार, दिल्ली विकास विहार निवासी अक्षय, मंडावली निवासी ज्योति मलिक व इंदिरापुरम निवासी पिकी रावत हैं। कॉल सेंटर का संचालन प्रदीप व सुमित कर रहे थे। इन दोनों को वर्ष 2017 में 80 लाख रुपये की ठगी के मामले में हैदराबाद पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है और दोनों जेल भी गए थे।
उन्होंने बताया कि प्रदीप 12वीं पास है, जबकि सुमित मलिक स्नातक है। ज्योति मलिक, सुमित की बहन है। राहुल, रूपेश, अक्षय 12वीं पास हैं। ये लोगों को कॉल करते थे। ज्योति मलिक स्नातक व पिकी रावत एमए कर चुकी हैं। ये दोनों भी कॉलर थीं। अक्षय के मोबाइल से पुलिस को इंश्योरेंसधारकों का एक डाटा मिला है। इनका एक साथी जीतू साहनी फरार है। पुलिस उसे तलाश रही है। पुलिस ने आरोपितों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक चेकबुक, चार चेक की फोटो कॉपी, 21 पन्नों का डाटा, एक लैपटॉप, छह एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, मोटरसाइकिल आदि सामान बरामद किया है। ऐसे करते थे ठगी
अजय सिंह कविनगर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपितों के पास इंश्योरेंस पॉलिसीधारकों को डाटा आता था। वह कॉल सेंटर से उन्हें फोन करते थे और उन्हें कुछ पैसा जमा करने का झांसा देकर पॉलिसी में बड़े फायदे का सपना दिखाते थे। यह धंधा आरोपित 2015 से चला रहे थे। पुलिस को अब तक जिन बैंक खातों की जानकारी हुई है, उन्हें पुलिस ने सीज करा दिया है। डाटा के आधार पर पुलिस पीड़ित लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

